जब से पांव हमारे चादर के अन्दर
हो गये
हम तो बिना जंग के ही सिकन्दर
हो गये
॰॰
जमें से कतरे मेहनत के ही पास
थे अपने
ऐसे घुले, घुलकर कतरे भी समन्दर
हो गये
॰॰
जब से पाया धीरज का नन्हा सा मोती
यहां
कुछ न बदला, बस पापी से कलन्दर
हो गये
॰॰
जरा हिम्मत कर देख, पतंग की डोरियां
भी
तूफान में कश्ती को बाधंने के
लगंर हो गये
॰॰
बुरे के खिलाफ बोलना ही जिम्मेदारी
है अपनी
शायर नही है, जो गांधी जी के बन्दर
हो गये
॰॰
कर यकीन खुद पे, बन्दो की पनाह
छोडी जब
अपने आप ऊपर वाले की छ्तरी अन्दर
हो गये
-जितेन्द्र तायल
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